हरियाणा में भी लागू होगा NRC, कानून आयोग के गठन पर भी विचार

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि असम की तरह हरियाणा में भी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) लागू किया जाएगा। इसके अलावा राज्य में कानून आयोग का गठन करने पर भी विचार किया जा रहा है। समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों की सेवाएं लेने के लिए अलग से एक स्वैच्छिक विभाग का गठन भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रविवार को अपनी सरकार के पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी देने के लिए रष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे महा जनसंपर्क अभियान के अंतिम दिन पंचकूला में हरियाणा राज्य मानव अधिकार आयोग के पूर्व चेयरमैन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) एचएस भल्ला के सेक्टर 16 स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

एक प्रश्न के उतर में मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पांच दिवसीय महा जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। उसी कड़ी में आज पंचकूला में वे विभूतियों से मिल रहे हैंं। न्यायमूर्ति भल्ला के अलावा पूर्व एडमिरल जेएस लांबा तथा लेेफ्निेट सेवानिवृत बलजीत सिंह जायसवाल से भी उन्होंने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में किए गए कार्यों की जानकारी लोगों तक पंहुचाना है। वे आने वाले समय में क्या करना है, इसके बारे भी प्रबुद्ध लोगों से सुझाव भी ले रहे हैंं। अच्छे सुझाव को हम अपने संकल्प पत्र में शामिल भी कर सकते हैंं।

एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार पहचान पत्र पर हरियाणा सरकार तेजी से कार्य कर रही है तथा इसके आंकड़ों का उपयोग राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में भी किया जाएगा। उन्होंने न्यायमूर्ति एचएस भल्ला के प्रयासों की सराहना की कि सेवानिवृति के बाद भी वे NRC डाटा का अध्ययन करने के लिए असम के दौरे पर जा रहे हैंं। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए भी एक तरीके से बेहतर होगा और भल्ला की सेवाएं राज्य में स्थापित किए जाने वाले NRC के लिए उपयोगी होंगी।

मुख्यमंत्री ने भल्ला के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुछ कानून बहुत पुराने हो गए हैं, उन्हें बदलने की भी आवश्यकता है। उदाहरण के लिए वन विभाग का पीएलपी एक्ट ऐसा है, जिसमें बदलाव जररी है। हरियाणा सरकार ने इसमें संशोधन भी किया है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार अनुछेद 370 व धारा 15ए अखंड भारत के निर्माण में लगभग 70 व 72 वर्षों से अडचन बनी हुई थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार के दूसरे कार्यकाल में संशोधित कर दिया है। पूरे भारत में इसकी प्रशंसा हो रही है। लेेफ्निेट जनरल बीएस जयसवाल ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि संविधान का अनुछेद 51 नागरिकों का देश के प्रति क्या कर्तव्य होना चाहिए इसकी व्याख्या देता है, परंतु कोई भी सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमें मौलिक अधिकारों के साथ-साथ क्या देश के प्रति हमारे कर्तव्य हैंं, इसकी भी जानकारी देता है। नागरिकों को अधिकारों की तरह अपने कर्तव्यों के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ के प्रचारक के रूप में उनमें तो देश सेवा, राष्ट्र सेवा व समाज सेवा सर्वोंपरी है और पिछले पांच वर्षों से प्रदेश के ढाई करोड़ लोगों को अपना परिवार मानकर उन्होंने निष्ठाभाव व पारदर्शी तरीके से कार्य किए हैंं।

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